Pew Dew Pew Dew Pew • Now Send a message Hindi Audio Chudai Story: 'अतिथि तुम कब जाओगे'? जैसे सवाल से बचने के लिए रखें इन बातों का ख्याल

Friday, 22 July 2016

'अतिथि तुम कब जाओगे'? जैसे सवाल से बचने के लिए रखें इन बातों का ख्याल

'अतिथि तुम कब जाओगे'? जैसे सवाल से बचने के लिए रखें इन बातों का ख्याल

‘भारत में हाथ से बर्तन छूटने का मतलब घर में किसी मेहमान के आने का इशारा’, और ऐसा होते ही त्योरियां चढ़ जाती हैं, घर का बजट बिगड़ने का डर सताने लगता है। क्या ऐसी भावना सभी मेहमानों के प्रति होती है या कुछ के आने से ख़ुशी भी मिलती है?
मेहमान हमेशा अव्यवस्था ही बढ़ाए ऐसा ज़रूरी नहीं है। पहले कभी अतिथि को भगवान माना जाता था। पर आजकल की आर्थिक परिस्थितियों और ऊपर से समय की कमी के चलते अतिथि को परेशानी की तरह लिया जाने लगा है। पुर्तगाली कहावत है, ‘यात्रा हमेशा ख़ुशी देती है, चाहे मेहमानों के आने से या उनके जाने से’। क्या ऐसे मेहमान भी होते हैं जिनके आने पर भी ख़ुशी मिले? आइए जानते हैं अच्छे अतिथि के गुण...
जाने से पहले बता दें
अच्छा मेहमान बनने का उसूल है- ‘योजना बनाने से पहले ही मेज़बानों को सूचित करना।’ उनसे विनम्रता से यह भी पूछ लें कि उस दौरान आपकी कोई और योजना तो नहीं है। किसी की बनी बनाई योजना में ख़लल डालकर अच्छे मेहमान तो नहीं बन सकते। हां, समय से पहले सूचना देने से मेज़बान भी आपके हिसाब से चीज़ों का प्रबंधन कर सकते हैं। यानी यह दोनों के लिए अच्छा है। जाने की तिथि के बारे में भी उन्हें किसी बहाने बता ही दें। मेज़बान को आश्चर्यचकित करने के लिए पहले से पहुंच जाने की ग़लती तो बिल्कुल भी न करें।

बच्चों की मर्ज़ी ज़रूर पूछ लें
कहीं बाहर जाते समय बच्चे अक्सर कहते हैं,‘मैं बोर हो रहा हूं!’ क्या घूमने जाने से पहले बच्चों के लिए आपने कोई योजना बनाई है? अगर मेज़बान के घर में हमउम्र बच्चे नहीं हैं, तब तो उनके लिए खिलौने, किताबें रखना बिल्कुल न भूलें। इस बात का भी ध्यान रखें कि वे उनके घर में सलीके से पेश आएं।

बातचीत ज़रूर करें
भले ही आप अंतर्मुखी क़िस्म के व्यक्ति हों, पर किसी के घर मेहमान बनकर गए हैं तो बातचीत करें। अपने आप में ही खोए रहेंगे तो यह दोनों के लिए बोझ लगेगा। यह भी ध्यान रखें कि बातचीत का विषय ऐसा न हो जिसमें सामने वाला रुचि ही न ले। माहौल और परिस्थिति के हिसाब से ही संवाद करना चाहिए। फोन चैटिंग की आदत कुछ दिनों के लिए भूल ही जाइए। खुली और स्वस्थ चर्चा कीजिए।

घर की ज़रूरतें देख लें
कहीं ऐसा तो नहीं कि आप सुबह-सुबह उठकर बाथरूम पर कब्ज़ा कर लें। यह दफ़्तर या स्कूल का भी समय हो सकता है। बेहतर होगा पहले ही पड़ताल कर लें कि किसके बाहर जाने का क्या वक़्त होता है। इसके साथ ही अगर वहां पानी की कमी हो, तो इसका भी ध्यान रखें। ज़्यादा पानी में नहाने की आदत हो तो कुछ दिन के लिए इसे बदल लें।

नखरे न दिखाएं
‘मैं लौकी नहीं खाता, मुझे सुबह सात बजे ही चाय चाहिए।’ अरे ये हमारा घर नहीं है, सामंजस्य तो बैठाना पड़ेगा। सुबह सात बजे चाय पीते हों तो अब आठ बजे पी लीजिए। खाने-पीने में बहुत ज़्यादा चयनात्मक हों, तो मेज़बानों को पहले ही बता दीजिए। इसके अलावा बहुत सुबह उठने या देर तक सोने की आदत हो तो कुछ दिनों के लिए ये आदतें भी बदल लीजिए। बच्चों की बार-बार पानी पीने की आदत होती है, ऐसे में ख़्याल रखें कि ज़्यादा बर्तन न ख़राब हों।

अपना ही घर समझें
मेज़बानों का ही तौलिया-साबुन उपयोग करना, चादरें-गिलाफ़ गंदा करना, पानी का गिलास यहां-वहां रखना, ऐसे में अगर घर के सारे क़ायदों की पतंग उड़ा देंगे, तो अगली बार मेज़बान नहीं कहेंगे, ‘इसे अपना ही घर समझें।’ इस दौरान दूसरों की निजता का ख़्याल रखना भी ज़रूरी है। यदि कोई देर रात तक काम कर रहा है, तो उसे बेवजह की बातों में शामिल होने के लिए दबाव न बनाएं।

बच्चों को घुमाने ले जाएं
अगर आपने घूमने की कोई योजना बनाई है, तो मेज़बान के बच्चों को भी अपने साथ ले जाएं। मेज़बानों से साथ चलने का आग्रह कर सकते हैं। इस तरह उनको सुकून भरा कुछ वक़्त भी मिल जाएगा। घूमने के लिए ख़ुद परिवहन की व्यवस्था भी कर सकें, तो अच्छा। चाहें तो आख़िरी दिन कहीं बाहर खाने की योजना बना लें। इसके साथ ही कोई उपहार भी दे सकते हैं। यह होगा आपका आभार।

मेज़बानों के लिए सीख
मेज़बानी करना आसान नहीं है, पर एक रूसी कहावत है कि यदि आप किसी की मेहमाननवाज़ी कर रहे हैं, तो उनके पालतू कुत्ते का भी ध्यान रखिए। मतलब मेहमानों के आगमन को उत्सव की तरह लीजिए। घर में किसी के आने से थोड़ी अव्यवस्था तो होगी, पर इसके लिए ग़ुस्सा, चिड़चिड़ापन, तनाव लेना ग़लत है।

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