इनसे रिश्ता रखना हो सकता है सबसे फायदेमंद सौदा जो रहेगा हमेशा आपके साथ
यूं तो जिंदगी में रिश्तों की भरमार होती है। लेकिन इस सच को झुठलाया नहीं जा सकता कि किताबें सबसे बेहतर साथी हैं। साथ ही ये खजाना होती हैं ज्ञान का। दिमाग के लिए भोजन का काम करती हैं। एक विचारक ने तो यहां तक कहा है कि ‘अन्य चीजें बल से छीनी या धन से खरीदी जा सकती हैं मगर ज्ञान सिर्फ अध्ययन से ही प्राप्त किया जा सकता है।
हम सभी के दोस्त होते हैं, जो हर सुख-दुख के समय में हमारा साथ देते हैं। दोस्त अच्छे या बुरे हो सकते हैं। दोस्ती के इस रिश्ते को निभाते समय सभी को इस बात का ध्यान रखना पड़ता है की वे एक-दूसरे से अच्छी बांडिंग क्रिएट कर सकें। एक-दूसरे से उम्मीदें भी रहती हैं कि, अच्छी दोस्ती का फायदा भी मिल सके। लेकिन किताबें एक ऐसी दोस्त हैं, जो हर बार आपको कुछ न कुछ देती ही हैं, बदले में कुछ लेती नहीं। आप उससे नाराज हो सकते हैं, भला बुरा कह सकते हैं, उसे कही भी रख सकते हैं, लेकिन वो आपसे न कभी गुस्सा होगी और न ही बुरा मानेगी।
तकनीकी युग में भी आगे
मौजदा वक्त में जब एक क्लिक पर दुनिया की तमाम जानकारी मौजूद है, किताबें अब भी लोगों की पसंद बनी हुई हैं। किताबों ने अब खुद को डिजिटल फार्मेट में ढाल लिया है। किताबों ने अपने चाहने वालों के हिसाब से नई तकनीक के तहत भी खुद को संभालकर रखा हुआ है।
सच्ची सलाहकार भी
जब भी कोई किसी प्रॉब्लम में आता है और उसे किसी जानकारी की जरुरत पड़ती है, ऐसे समय में किताबें एक अच्छे दोस्त की तरह सलाहकार की भूमिका निभाती हैं। समस्या चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो किताबें उसका हल बता ही देती हैं।
शिक्षक की तरह बांट रहीं नाॅलेज किताबों को स्टोर हाउस ऑफ नॉलेज या एक शिक्षक कहें तो यह कतई गलत नहीं होगा। यह न सिर्फ हर किसी को जानकारी देती हैं। बल्कि एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक होते हुए ज्ञान का संचार भी करती रहती हैं।
बच्चों सी देखभाल
एक पाठक और किताबों में पिता और बच्चों सा भी रिश्ता देखने को मिलता है। एक पिता जिस तरह से अपने बच्चों को संभालता है। उन्हें छोटी-बड़ी परेशानियों से निकालने में अपनी ताकत झोंक देता है। किताबें भी अपने पाठक में देखरेख के ऐसे भाव पैदा कर देती हैं। किताबों को इस तरीके से पढ़ें और उन्हें संभालकर रखें जिससे वह दूसरों के भी काम आ सके। किताबों का जितना इस्तेमाल होगा उतना ज्ञान फैलेगा।
करती हैं चरित्र निर्माण
पर्सनॉलिटी डेवलपमेंट से लेकर चरित्र निर्माण तक में किताबों की भूमिका महत्वपूर्ण हैं। सामान्यत: जैसी किताबें पाठक पढ़ता है, उस जैसा व्यवहार वह करता है। मोटिवेशनल, बॉयोग्राफी और ऑटोबायोग्राफी से अच्छे सिटीजन्स तैयार हो सकते हैं जो देश की ग्रोथ के भागीदार रहते हैं। इसलिए यह कहना गलत नहीं कि राष्ट्र के निर्माण में किताबों का अहम योगदान है।
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