जरा सी असावधानी ऑनलाइन रिश्तों में ला सकती है दरार, रखें इनका ध्यान
तेजी से बदले इंटरनेट इस्तेमाल और सोशल नेटवर्किंग साइट्स ने रिश्तों की एक नई परिभाषा तैयार की है। बदलते लाइफस्टाइल और बिजी शेड्यूल के चलते पर अब युवा इन साइट्स के जरिए ही संबंधों को बढ़ा रहे हैं। जानते हैं इस दोस्ती के मायने।
सोशल नेटवर्किंग साइट्स एक ऐसा वर्चुअल वर्ल्ड है, जिसमें हम विभिन्न तरह के लोगों से मिलते हैं। कभी-कभी की चैट, मैसेज और फोटो लाइकिंग की आदत कई तरह के दोस्तों से मुलाकात कराती है। हालांकि यह जरूरी नहीं होता कि हर दोस्त हमारी उम्मीदों पर खरा उतरे या हम उसकी सभी इच्छाओं को पूरा कर पाएं। इनमें से कुछ लोग बेहद खास दोस्त बन जाते हैं तो कुछ ऐसे भी लोग मिलते हैं, जिनसे पीछा छुड़ाना मजबूरी बन जाती है, लेकिन फिर भी उनसे निजात नहीं मिल पाती।
अगेन्स्ट
सोशल नेटवर्किंग साइट्स का दीवाना युवा भले ही कितना हाईटेक हो गया हो, लेकिन रिश्तों के मामले में वह अब भी कई बार नासमझी दिखाता है। साइट्स पर दोस्ती और रिश्तों को लेकर की गई एक छोटी सी गलती बना बनाया खेल बिगाड़ सकती है। सोशल मीडिया पर चैट और फोटो अपडेशन के बाद कई बार दोस्ती की आड़ में अपराध के बड़े मामले सामने आते रहे हैं।
फेवर
सोशल नेटवर्किंग साइट्स से बने रिश्तों के कई साइड इफेक्ट सामने आ चुके हैं, इसका मतलब यह कतई नहीं है कि इन्हें बंद या ब्लॉक कर देना चाहिए। इसके बहुत से सकारात्मक पहलू भी हैं। यही वजह है कि स्कूल गोइंग स्टूडेंट से लेकर सेलीब्रिटि, बिजनेसमैन और पॉलिटिशीयन तक इसका इस्तेमाल दिनचर्या की तरह करते हैं। हां यहां रिश्ते तभी तक सुरक्षित हैं, जब तक प्रयोग सुरक्षित ढंग से हो।
संबंध निभाना एक कला : निजता बनाए रखें
रिश्ते चाहे सोशल मीडिया पर बने हों या वास्तविक दुनिया में, उनको संभालना भी एक कला है, जिसमें भटकाव ज्यादा है। जिस तरह से वास्तविक दुनिया में रिश्ते एक दिन में नहीं बन जाते, उसी तरह सोशल मीडिया में भी रिश्ते बनाने के लिए उसे पनपने का समय देना आवश्यक है। इसी के साथ-साथ यह भी आवश्यक है कि रिश्तों में ईमानदारी और समझदारी बरती जाए। इन्हें सोशल मीडिया पर उतना ही दिखाएं, जितना जरूरी है। पर्सनल एल्बम और सोशल मीडिया अपडेट में अंतर पहचानना आवश्यक है।
अपने रिश्ते की हर गतिविधि को पोस्ट के तौर पर पेश करने से बचना चाहिए। संबंधों की निजता का अपना महत्व है। निजी बातों के पब्लिकली होने से संबंधों के दिखावटी होने का ही एहसास होता है।
संभलकर करें दोस्ती
सोशल साइट्स में अक्सर लोग अपनी गलत प्रोफाइल दे देते हैं, जिससे प्रभावित होकर ही लोग दोस्ती करना और बातें करना पसंद करते हैं। बाद में जब उस गलती का पता चलता है, तब इमोशनल बांडेज को धक्का लगता है। इसके अलावा इन साइट्स के यूजर अपनी फैमिली व रिलेटिव से भी कटते जाते हैं।
सामान्य लेकिन खास
इन साइट्स का उपयोग कर आप आसानी से नए लोगों को दोस्त बना सकते हैं। एक फ्रेंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट करते ही नई दोस्ती का दौर शुरू।
1. सोशल नेटवर्किंग आपको अकेलेपन का शिकार नहीं होने देता है।
2. आप हमेशा व्यस्त रहते हैं।
3. आपको इस बात का अहसास होता है कि कोई आपकी बात सुन रहा है।
विशेषज्ञ विरोध में
रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ वेल्स में मनोविज्ञान के रीडर और हेड ऑफ रिसर्च मार्टिन ग्राफ के अनुसार सोशल मीडिया रिश्तों को बनाने से ज्यादा बिगाड़ने का काम कर रहा है। जो भी इस पर ज्यादा एक्टिव रहते हैं, उनके रिश्ते बिगड़ने के पीछे इसकी महत्वपूर्ण भूमिका देखी गई है। शोध के अनुसार जो लोग 36 महीने या उससे कम में रिलेशनशिप में रहे हैं, उनकी रिलेशनशिप बिगड़ने में सोशल नेटवर्किंग का खास रोल था।
तेजी से बदले इंटरनेट इस्तेमाल और सोशल नेटवर्किंग साइट्स ने रिश्तों की एक नई परिभाषा तैयार की है। बदलते लाइफस्टाइल और बिजी शेड्यूल के चलते पर अब युवा इन साइट्स के जरिए ही संबंधों को बढ़ा रहे हैं। जानते हैं इस दोस्ती के मायने।
सोशल नेटवर्किंग साइट्स एक ऐसा वर्चुअल वर्ल्ड है, जिसमें हम विभिन्न तरह के लोगों से मिलते हैं। कभी-कभी की चैट, मैसेज और फोटो लाइकिंग की आदत कई तरह के दोस्तों से मुलाकात कराती है। हालांकि यह जरूरी नहीं होता कि हर दोस्त हमारी उम्मीदों पर खरा उतरे या हम उसकी सभी इच्छाओं को पूरा कर पाएं। इनमें से कुछ लोग बेहद खास दोस्त बन जाते हैं तो कुछ ऐसे भी लोग मिलते हैं, जिनसे पीछा छुड़ाना मजबूरी बन जाती है, लेकिन फिर भी उनसे निजात नहीं मिल पाती।
अगेन्स्ट
सोशल नेटवर्किंग साइट्स का दीवाना युवा भले ही कितना हाईटेक हो गया हो, लेकिन रिश्तों के मामले में वह अब भी कई बार नासमझी दिखाता है। साइट्स पर दोस्ती और रिश्तों को लेकर की गई एक छोटी सी गलती बना बनाया खेल बिगाड़ सकती है। सोशल मीडिया पर चैट और फोटो अपडेशन के बाद कई बार दोस्ती की आड़ में अपराध के बड़े मामले सामने आते रहे हैं।
फेवर
सोशल नेटवर्किंग साइट्स से बने रिश्तों के कई साइड इफेक्ट सामने आ चुके हैं, इसका मतलब यह कतई नहीं है कि इन्हें बंद या ब्लॉक कर देना चाहिए। इसके बहुत से सकारात्मक पहलू भी हैं। यही वजह है कि स्कूल गोइंग स्टूडेंट से लेकर सेलीब्रिटि, बिजनेसमैन और पॉलिटिशीयन तक इसका इस्तेमाल दिनचर्या की तरह करते हैं। हां यहां रिश्ते तभी तक सुरक्षित हैं, जब तक प्रयोग सुरक्षित ढंग से हो।
संबंध निभाना एक कला : निजता बनाए रखें
रिश्ते चाहे सोशल मीडिया पर बने हों या वास्तविक दुनिया में, उनको संभालना भी एक कला है, जिसमें भटकाव ज्यादा है। जिस तरह से वास्तविक दुनिया में रिश्ते एक दिन में नहीं बन जाते, उसी तरह सोशल मीडिया में भी रिश्ते बनाने के लिए उसे पनपने का समय देना आवश्यक है। इसी के साथ-साथ यह भी आवश्यक है कि रिश्तों में ईमानदारी और समझदारी बरती जाए। इन्हें सोशल मीडिया पर उतना ही दिखाएं, जितना जरूरी है। पर्सनल एल्बम और सोशल मीडिया अपडेट में अंतर पहचानना आवश्यक है।
अपने रिश्ते की हर गतिविधि को पोस्ट के तौर पर पेश करने से बचना चाहिए। संबंधों की निजता का अपना महत्व है। निजी बातों के पब्लिकली होने से संबंधों के दिखावटी होने का ही एहसास होता है।
संभलकर करें दोस्ती
सोशल साइट्स में अक्सर लोग अपनी गलत प्रोफाइल दे देते हैं, जिससे प्रभावित होकर ही लोग दोस्ती करना और बातें करना पसंद करते हैं। बाद में जब उस गलती का पता चलता है, तब इमोशनल बांडेज को धक्का लगता है। इसके अलावा इन साइट्स के यूजर अपनी फैमिली व रिलेटिव से भी कटते जाते हैं।
सामान्य लेकिन खास
इन साइट्स का उपयोग कर आप आसानी से नए लोगों को दोस्त बना सकते हैं। एक फ्रेंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट करते ही नई दोस्ती का दौर शुरू।
1. सोशल नेटवर्किंग आपको अकेलेपन का शिकार नहीं होने देता है।
2. आप हमेशा व्यस्त रहते हैं।
3. आपको इस बात का अहसास होता है कि कोई आपकी बात सुन रहा है।
विशेषज्ञ विरोध में
रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ वेल्स में मनोविज्ञान के रीडर और हेड ऑफ रिसर्च मार्टिन ग्राफ के अनुसार सोशल मीडिया रिश्तों को बनाने से ज्यादा बिगाड़ने का काम कर रहा है। जो भी इस पर ज्यादा एक्टिव रहते हैं, उनके रिश्ते बिगड़ने के पीछे इसकी महत्वपूर्ण भूमिका देखी गई है। शोध के अनुसार जो लोग 36 महीने या उससे कम में रिलेशनशिप में रहे हैं, उनकी रिलेशनशिप बिगड़ने में सोशल नेटवर्किंग का खास रोल था।
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