Pew Dew Pew Dew Pew • Now Send a message Hindi Audio Chudai Story: मां बातों-बातों में सिखा देती है लाइफ के ये 7 जरूरी चैप्टर्स, जो आते हैं बहुत काम

Friday, 22 July 2016

मां बातों-बातों में सिखा देती है लाइफ के ये 7 जरूरी चैप्टर्स, जो आते हैं बहुत काम

मां बातों-बातों में सिखा देती है लाइफ के ये 7 जरूरी चैप्टर्स, जो आते हैं बहुत काम
मां के प्यार की कोई सीमा नहीं होती। जिंदगी के कई चैप्टर्स को सिखाने के लिए कभी वो प्यार का सहारा लेती है तो कभी मार का। लेकिन इस बात की पूरी गारंटी होती है कि उससे बेहतरीन जिंदगी के पड़ावों को कोई दूसरा समझा ही नहीं सकता। जो फ्यूचर में बहुत काम आती है। जानेंगे क्या हैं वो जरूरी सीख....
केयर
मां अपने बच्चों से ज्यादा शायद ही किसी से प्यार करती है। सबसे खास बात है कि ऐसा सिर्फ इंसानों में ही नहीं जानवरों के साथ भी देखने को मिलता है। बंदर, हाथी, कुत्ते से लेकर शेर, चूहे तक के साथ इस प्यार को देखा जा सकता है। बचपन से लेकर बड़े होने तक मां के केयरिंग नेचर में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं आता। वो आज भी अपने बच्चों को फोन करके सबसे पहले यही पूछती है खाना खाया या नहीं, तबियत ठीक है या नहीं, किसी तरह की कोई परेशानी तो नहीं?
फ्यूचर लाइफ के लिए बहुत ही जरूरी केयरिंग नेचर को मां से सीखा जा सकता है। वैसे पेरेंट्स बनने के बाद यह नेचर खुद-ब-खुद डेवलप हो जाता है।

रिस्पॉन्सबिलिटी
बचपन से लेकर बच्चों के होश संभालने तक उनके खाने-पीने, पहनने, स्कूल जाने-ले आने तक की जिम्मेदारी मां अच्छे से निभाती है। यहां तक कि पेरेंट्स मीटिंग में जाना हो या फिर स्कूल फंक्शन की तैयारी और तो और होमवर्क कराने की रिस्पॉन्सबिलिटी भी उनके ऊपर ही होती है जिसे बिना घबराए और थके हुए वो आराम से उठाती रहती हैं।
लाइफ का दूसरा जरूरी चैप्टर, रिस्पॉन्सबिलिटी, कैसे निभाते हैं इसे मां से ज्यादा अच्छा और आसानी से कोई नहीं सीखा सकता।

अनुशासन
बड़ों के साथ कैसे पेश आना है और बच्चों के साथ कैसे बात करनी है इन सबकी सीख सबसे पहले घर में मौजूद मां रूपी टीचर से ही मिलती है। उनकी हर कोशिश करती है आपको सिर्फ पढ़ा-लिखा कर ही नहीं बल्कि बाकी कामों में भी अनुशासन सिखाकर एक अच्छा इंसान बनाने की। जैसे-जैसे आगे बढ़ते जाते हैं ये सारी चीजें आदतों में शुमार होते जाती हैं जो प्रोफेशनल से लेकर पर्सनल लाइफ तक में बहुत ही काम आती हैं।
ये है लाइफ का तीसरा जरूरी चैप्टर जो मां से सीखने को मिलता है।
लव
सच्चे और बिना किसी मतलब के प्यार की मिसाल होता है मां को अपने बच्चों से प्यार। दिन बदल जाए, मौसम बदल जाए या फिर माहौल, इनके इस प्यार में कभी कोई कमी नहीं होती। सबसे अच्छी बात होती है कि उनके दिल में सभी बच्चों के लिए लगभग एक जैसा ही प्यार देखने को मिलता है। इसी प्यार की उम्मीद वो अपने बच्चों से भी रखती हैं लेकिन बदलते वक्त के साथ बच्चों का प्यार भी बदलते जाता है।
प्यार की सच्चाई और गहराई, लाइफ का चौथा जरूरी चैप्टर मां से सीखा जा सकता है।
माफ करना
बड़ों की बातों का जवाब न देना, छोटे के बड़बोलेपन को हंस कर टाल देना, एक तरह से माफ करना ही तो होता है। परिवार को बांधे रहने के लिए उन्हें अच्छी तरह से पता होता है कि क्या नजरअंदाज करना है और कब बोलना है। इतना ही नहीं, कई बार बच्चों के भी जवाब देने पर मां अक्सर सुनकर खामोश रह जाती है। और जब देर रात तक बच्चे गुस्सा कर मुंह फुलाए रहते हैं तो वो उन्हें खाना भी खिलाने आती है।
इगो को साइड रखकर कैसे रिलेशनशिप को निभाते हैं इसे मां से बेहतर कोई नहीं समझा सकता।
भरोसा
शादी के बाद नए घर में जाना, वहां के रीति-रिवाजों को अपनाना, सबसे मिल-जुल कर रहना, ये भरोसा ही तो होता है जो नए घर से नए रिश्ते जोड़ने का काम करता है। सास आसानी से अपनी सारी जिममेदारियां बहु को सौंप देती है जो बहुत ही कम टूटते हुए देखा गया है। मां इसी भरोसे की चाहत अपने बच्चों और अपने आने वाली पीढ़ी से भी करती है।
छठा चैप्टर, जो सीखने को मिलता है मां से।
सहनशक्ति
सहनशक्ति का पाठ तो मां से बेहतर कोई सीखा ही नहीं सकता जिसने पूरे 9 महीने आपको अपने अंदर पाला होता है। उसके बाद भी कई महीनों तक वो अपना जरूरी वक्त बच्चों की देख-रेख में बिता देती हैं और किसी से इसकी शिकायत तक नहीं करतीं। सहनशक्ति का इससे बेहतरीन कोई दूसरा उदाहरण हो ही नहीं सकता।
सांतवा और सबसे जरूरी चैप्टर, लेकिन यहां इस बात का ध्यान रखें कि गलत बातों को भी चुपचाप सहना नहीं है उसके खिलाफ आवाज उठाना चाहिए।

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