Pew Dew Pew Dew Pew • Now Send a message Hindi Audio Chudai Story: हाउस हसबैंड की रिस्पॉन्सिबिलिटी बनाती है पुरुषों को स्मार्ट और इंडिपेंडेंट

Friday, 22 July 2016

हाउस हसबैंड की रिस्पॉन्सिबिलिटी बनाती है पुरुषों को स्मार्ट और इंडिपेंडेंट

हाउस हसबैंड की रिस्पॉन्सिबिलिटी बनाती है पुरुषों को स्मार्ट और इंडिपेंडेंट


बिजी शेड्यूल और बदलते वक्त का सबसे ज्यादा असर लाइफस्टाइल पर देखने को मिल रहा है। पहले जहां महिलाएं घर और पुरुष ऑफिस की जिम्मेदारी संभालते थे वहीं आज पुरुष आगे बढ़कर हाउस हसबैंड की भूमिका निभा रहे हैं जिसे करने में उन्हें किसी तरह की समस्या भी नहीं। महिलाएं उन्हें इस रोल में खुशी से एक्सेप्ट कर रही हैं वहीं पुरुषों को खुद भी कई तरह के बदलाव देखने को मिल रहे हैं।
जिम्मेदारी का अहसास
जब पुरुष घर संभालने की जिम्मेदारी उठाते हैं तो बेशक लोग उन्हें जोरू का गुलाम कहकर पुकारते हैं लेकिन इसी बहाने उन्हें जिम्मेदारियों का अहसास होता है। चीजों को हैंडल करने से लेकर परिवार को मैनेज करना जैसी कई बातें इस दौरान जानने-समझने को मिलती हैं। साथ ही, सबसे जरूरी उन्हें इस दौरान महिलाओं की सिचुएशन समझने का मौका मिलता है।

पेशेंस लेवल बढ़ना
घर की जिम्मेदारियों को संभालते-संभालते, बात-बात पर गुस्साने वाले पुरुषों के अंदर भी पेशेंस आ जाता है। जिसके चलते पहले वो सिचुएशन के निगेटिव होने पर बिगड़ते नहीं बल्कि उसे समझते हुए आराम से उसे सुलझाने की कोशिश करते हैं।

समझदारी दिखाना
पुरुष जब कामकाजी होते हैं तो अक्सर घर देर से लौटते हैं, बैठे—बैठे चाय-कॉफी की डिमांड करते हैं, अपनी चीजें कहीं भी उतार कर रख देते हैं। लेकिन वहीं महिलाएं जब ऑफिस से घर आती हैं तो न ही ऐसी कोई डिमांड करती हैं और न ही अपनी चीजों को फैलाकर रखना पसंद करती हैं। इस बात की समझ उन्हें हाउस हसबैंड बनने के बाद आती है।

बराबरी की भावना
हाउस हसबैंड बनने पर पुरुषों को अहसास होता है कि महिलाओं का काम भी मुश्किल होता है बशर्ते वो वो कभी किसी चीज की शिकायत नहीं करतीं। पुरुष जब महिलाओं की जगह लेते हैं तब वो बेहतर तरीके से उनके काम को, उनके योगदान को समझ पाते हैं जिससे दोनों के बीच के अंतर को मिटा पाना आसान हो जाता है।

रिस्पेक्ट करना
पुरुष जब महिला की जगह लेते हैं तो उनके अंदर महिलाओं के लिए रिस्पेक्ट खुद-ब-खुद आ जाती है। उन्हें महिलाओं के प्रेशर और रिस्पॉन्सिबिलिटी को बेहतर तरीके से समझने का मौका मिलता है। केवल पत्नी ही नहीं परिवार की लगभग सभी महिलाओं उनके इस दायरे में नजर आने लगती हैं।

नो मोर इगो
पुरुष ही घर को चला सकता है, वही घर का मुखिया होता है जैसी बातें करने वाले पुरुष एक दिन भी घर पर रहकर महिलाओं के हिस्से आने वाली जिम्मेदारी को निभाते हैं तो उनकी ये सोच बदल जाती है। उनका इगो दूर हो जाता है। रिलेशनशिप में इगो को इग्नोर करना भी बड़ी बात होती है।

पेरेंट्स बनने का अहसास
हाउस हसबैंड बनने के बाद पुरुषों को अहसास होता है कि महिलाएं किस तरह बच्चों के फिजिकल और मेंटल ग्रोथ में साथ देती है। बातों और जिम्मेदारियों को समझते हुए अपने बिजी शेड्यूल से बच्चों के लिए टाइम मैनेज करते हैं जो बच्चों के साथ उनकी बॉन्डिंग को स्ट्रॉन्ग बनाने का काम करती है।

इंडिपेंडेट बनना
हर काम के लिए महिलाओं पर डिपेंड रहने वाले पुरुष हाउस हसबैंड की जिम्मेदारी संभालते ही इंडिपेंडेंट बन जाते हैं। अपना ब्रेकफास्ट रेडी करना, कपड़े खुद प्रेस करना, चीजों को सही जगह पर रखना और घर का हिसाब-किताब रखने जैसे कई काम आसानी से कर लेते हैं।

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