इमोशनली नहीं प्रैक्टिकली हैंडल करें ऑफिस में शुरू हुए रिलेशनशिप को
मौजूदा वक्त में ज्यादातर युवा परिवार से दूर रहकर दूसरे शहर में नौकरी कर रहे हैं। ऐसे में सहकर्मियों के बीच में प्यार और अफेयर की खबरें ज्यादा सुनने में आने लगी हैं। कॉलेज लाइफ के बाद वर्किंग प्लेस ही ऐसी जगह है जहां प्यार के बाद रिश्ते ज्यादा बनते हैं।
ऑफिस में इस तरह के रिलेशनशिप्स युवाओं के कॅरिअरग्राफ के साथ ऑफिस के माहौल को भी प्रभावित करते हैं। ज्यादातर ऑफिसाें में सहकर्मियों के रोमांस, डेटिंग और प्रेम विवाह के बाद एक ही ऑफिस में काम करने को लेकर अलग-अलग एचआर पॉलिसी भी देखने को मिलती हैं। हालांकि यह भी सच है कि कोई भी एचआर पॉलिसी व्यक्ति के इमोशंस को कंट्रोल नहीं कर सकती और न ही उस पर किसी तरह का बैन लगा सकती है। लेकिन कई बार ऐसे रिश्ते गंभीर, सामाजिक सवाल खड़े करते हैं। ऑफिस कर्मियों के बीच आपसी रिश्ते कंपनी की आंतरिक नीतियों पर भी निर्भर करते हैं। कुछ ऑफिसों में तो नो ऑफिस रोमांस और डेटिंग पॉलिसी लागू की गई है। यदि ऐसा होता है तो दो में से किसी एक पार्टनर को जॉब छोड़नी होती है। नजदीकी रिश्तेदारों को भी यहां नहीं रखा जाता।
साख कहीं बिगड़ी तो कहीं बनी
निश्चिततौर पर ऑफिस में रोमांस और सहकर्मियों के आपसी नजदीकी संबंधों का प्रभाव काफी व्यापक होता है। ऐसे में ऑफिस गॉसिप और एक- दूसरे की छवि या साख को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों के ग्रुप एकसाथ सक्रिय हो जाते हैं। संस्थान के साथ- साथ कर्मचारियों की कार्यकुशलता पर भी इसका असर होता है। कई बार जब संबंध टूटते हैं तो उसका सीधा असर काम पर दिखने लगता है।
सावधानी जरूरी है
1. कई कंपनियां नो रोमांस, नो डेटिंग पॉलसी को सही नहीं मानतीं। इस संबंध में सबसे खास बात यही है कि किसी भी सिचुएशन में कलीग्स के आपसी रिश्तों का एम्प्लाई की कार्यकुशलता और काम करने के तरीकों पर निगेटिव असर नहीं होना चाहिए। हां, लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि इस तरह के संबंधों में अवेयरनेस और ट्रांसपेरेंसी होना बेहद जरूरी है।’
2. अगर पार्टनर वाकई एक-दूसरे के प्रति समर्पित हैं या शादी जैसे गंभीर रिश्ते के लिए तैयार हैं तो यह एक तौर से कंपनियों के लिए भी बेहतर साबित होता है। पति-पत्नी दोनों ही के हित एक कंपनी से जुड़े होते हैं। दोनों ऑफिस की प्रायोरिटी को समझते हैं, जिससे फैमिली स्ट्रेस कम होता है। नतीजतन फायदा कंपनी को होता है। इससे बढ़कर अगर वह एक ही जॉब प्रोफाइल में हैं तो कंपनी के आतंरिक नियमों की जानकारी दूसरे संस्थानों तक पहुंचने की आशंका भी नहीं रहती।
3. ऐसी स्थिति में दोनों के बीच समझदारी होना बेहद जरूरी है जिससे आगे चलकर मनमुटाव की स्थिति उत्पन्न न हो। विदेशों में कई कंपनियों में लव कॉन्ट्रैक्ट जैसी पॉलिसी भी अपनाई जाती है, जिससे कंपनी पहले ही अपने हितों और विवादित मसलों पर सतर्कता बरतती है। वैसे दोनों को खुलकर अपने पर्सनल और बिजनेस रिश्ते पर बात कर लेनी चाहिए।
युवा रखें ध्यान
कॅरिअर आज के समय में युवाओं की पहली प्राथमिकता बन चुका है। लेकिन मानसिक अकेलापन कई बार कुछ ऐसे रिश्तों की ओर ले जाता है, जहां समझ के सामने दिल हावी पड़ता है। इसलिए ध्यान दें...
1. ऑफिस में सहकर्मी के साथ डेटिंग करने से पहले कंपनी की पॉलिसी के बारे में जानकारी जरूर हासिल कर लें।
2. यदि ऑफिस में कोई सहकर्मी आपके पहले प्रपोजल को मना कर देता है, तो उसे ना ही समझें। दोबारा इस संबंध में बात न करें।
3. एक-दूसरे को स्पेस दें। पर्सनल इमोशंस को ऑफिस और अपने काम पर हावी न होने दें। ऑफिस में वर्किंग रिलेशन ही रखें।
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